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Wednesday, March 23, 2016

एक एहसास

कुछ बरस पुरानी बात है ये
एक सिलसिला शुरू हो रहा था,
खोज रहा था किसी और को, पर
खुद मैं ही कही खो रहा था

हालात कुछ इस तरह थे की
लगा एक एहसास बोल रहा था,
दिल की तो रज़ा राह पे बढ़ने की थी
पर दिमाग को कुछ ऐतराज़ हो रहा था

हो गया था बेखबर, हो गया था नादान
थी चाहत ऐसी की खुद ही को धोखा दे रहा था
जब खायी थी चोट इस दिल ने तब समझ मुझे आया
की समेटा उसे, जबकि बिखर मैं खुद रहा था।

Sunday, April 27, 2014

आजा तू एक फ़साने से ।

आजा तू एक फ़साने से,
अजनबी इस ज़माने से,
ख्वाइशें हैं तुझे छुपालु खुद में,
मिलजा तू मुझे बहाने से। 

ढूंढ़ता हूँ तुझे मैं इस कदर,
कहाँ गयी तू ओ बेखबर,
हो गयी है नम मेरी नज़र,
यूँ तेरे खो जाने से। 
आजा तू एक फ़साने से,
अजनबी इस ज़माने से,
ख्वाइशें हैं तुझे छुपालु खुद में,
मिलजा तू मुझे बहाने से। 

नजाने क्या मेरी हो गयी खता,
हो गयी इस कदर तू लापता,
आ जाये अब तू पास मेरे,
मेरे तुझको मनाने से।
आजा तू एक फ़साने से,
अजनबी इस ज़माने से,
ख्वाइशें हैं तुझे छुपालु खुद में,
मिलजा तू मुझे बहाने से। 

तेरे बिन हूँ मैं बिलकुल अधूरा,
तेरे अक्स से ही हुआ मैं पूरा,
जन्नत मुझे दिखलाजा तू,
अब मेरे करीब आ जाने से। 
आजा तू एक फ़साने से,
अजनबी इस ज़माने से,
ख्वाइशें हैं तुझे छुपालु खुद में,
मिलजा तू मुझे बहाने से।